Tamil Nadu

तो ये थी करुणानिधि को दफनाने की वजह

Karunanidhi cremation Tamil Nadu death 2018

 

मंगलवार शाम को तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री और DMK प्रमुख M. Karunanidhi के निधन से पूरे देश में शोक की लहर फैल गई, जहां पूरा देश उनके निधन से सदमे में है । उनके निधन के बाद तमिलनाडु में 1 दिन की छुट्टी और 7 दिन तक शोक घोषित किया गया है । वहीं करुणानिधि के दाह संस्कार और दफनाने को लेकर काफी विवाद भी हुआ ।

दरअसल DMK प्रमुख करुणानिधि के समर्थक और उनकी पार्टी ने उन्हें चेन्नई के प्रसिद्ध मरीना बीच में दफनाने की मांग की थी । इसके लिए DMK के कार्यकारी अध्यक्ष  MK Stalin ने भी तमिलनाडु के मुखिया सीएम पलानीस्वामी को भी चिट्ठी लिखकर करूणानिधि को दफनाने के लिए मरीना बीच में जगह की मांग की थी । आपको बता दें कि करुणानिधि के संरक्षक सीएन अन्‍नादुरई के स्‍मारक के बगल में एमके स्टालिन ने डीएमके प्रमुख को दफनाने की मांग की थी साथ ही करूणानिधि के समाधि स्थल की भी मांग की थी ।  जबकि तमिलनाडु सरकार ने ऐसा करुणानिधि के पार्थिव शरीर को दफनाने से मना कर दिया था । लेकिन मद्रास उच्च न्यायलय ने करुणानिधि  के पार्थिव शरीर को चेन्नई के मरीना बीच पर दफनाए जाने की अनुमति दे दी है ।

Karunanidhi last rituals Tamil Nadu

डीएमके प्रमुख एम करुणानिधि हिंदूवादी परंपरा से संबंधित थे लेकिन फिर भी उन्हें दफनाया जा रहा है जानिए इसके पीछे की वजहें-

द्रविड़ आंदोलन से जुड़े थे करुणानिधि

द्रविड़ आंदोलन प्रमुख  रूप से ब्राह्मणवादी और हिन्दू धर्म की परंपराओं का खुलकर विरोध करता है लिहाज इस आंदोलन से जुड़े नेता भगवान और हिंदू धर्म से जुड़े प्रतीकों में विश्वास नहीं रखते । वहीं तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री और डीएमके प्रमुख एम करुणानिधि द्रविड़ आंदोलन से जुड़े हुए थे अर्थात वे भी ईश्वर और हिंदूवादी परम्पराओं को नहीं मानते थे और तो और करुणानिधि अपने नाम के साथ हिन्दू धर्म का जातिसूचक टाइटल का भी इस्तेमाल नहीं करते थे| इसलिए उनके पार्थिव शरीर को दफनाया गया ।इससे पहले भी द्रविण आंदोलन से जुड़े अन्य दूसरे नेताओं का अंतिम संस्कार भी हिन्दू धर्म की मान्यताओं से अलग दफनाकर किया गया था ।

आपको बता दें कि  द्रविड़ आंदोलन से जु़ड़े कई बड़े नेता परियार, सीएन अन्‍नादुरई, एमजी रामंचद्रन और जयललिता को भी दफनाया गया था जबकि जयललिता को दफनानने को लेकर उनके नजदीकी रिश्तेदारों ने नाराजगी भी जाहिर की थी ।  आपको बता दें कि करुणानिधि  ने 26 जुलाई, 1969 को  डीएमके की कमान अपने हाथों में ली थी और तब से लेकर पार्टी के मुखिया बने रहे. इसके साथ ही उन्होनें 5 बार तमिलनाडु में  सीएम की कुर्सी भी संभाली और वे राज्यसभा के सदस्य भी रह चुके हैं ।

 

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