Delhi

दिल्ली के गवर्नर के घर के बाहर फेंको कूड़ा: सुप्रीम कोर्ट

Anil Baijal Delhi Garbage issue supreme court

राजधानी दिल्ली में इन दिनों हर जगह पर कूड़े के ढेर नज़र आ रहे हैं जिसको नगर निगम वाले अनदेखा कर रहे हैं. हालांकि हमारी भारतीय सरकार का एजेंडा “स्वच्छ भारत अभियान है” लेकिन इसके बावजूद भी सफाई की तरफ नगर निगम ध्यान नहीं दे रही। लगातार नगर निगमों की निष्क्रियता के चलते सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को उपराज्यपाल अनिल बैजल को चोरों की फटकार लगाई और कहा कि,

” अब से आप के घर के आगे कूड़ा फेंका जाएगा तब जाकर आप आम जनता की परेशानी समझ पाएंगे। “

सुप्रीम कोर्ट ने नगर निगम को ठोस अपशिष्ट घरेलू स्तर पर अलग करने का सुझाव दिया और साथ ही ऐसा करने से इनकार करने वालों से निपटने के लिए दंड का प्रावधान किया। आपकी जानकारी के लिए हम आपको बता दें कि किसी भी व्यक्ति के घर के बाहर कूड़ा फेंकना एक अपराध माना जाता है जिसके कारण कानूनी तौर पर व्यक्ति पर 133 धारा लगाई जा सकती है

उपराज्यपाल को सुप्रीम कोर्ट ने दक्षिण दिल्ली की ओर इशारा करते हुए कहा कि वहां हर रोज 18 टन कूड़ा इकट्ठा हो रहा है। ऐसे में यदि मैनेजमेंट प्लांट दिसंबर तक शुरू होंगे तो तब तक और कितना कचरा इकट्ठा हो जाएगा, इसका अंदाजा लगाना भी मुश्किल है। ऐसी ने बताया कि दिल्ली में आपातकाल जैसी स्थिति चल रही है ऐसे में नगर निगम को इस बात का आभास तक नहीं है।

इस बहस में न्यायमूर्ति मदन बी लोकुर और दीपक गुप्ता ने सुझाव दिया कि वह राजकीय निवास के सामने कूड़ा फेंकेंगे। लेकिन किसी एक स्थान से कूड़ा उठाकर दूसरे स्थान पर कूड़ा भी नहीं फेंका जा सकता ऐसे में तीसरा विकल्प तलाशना ही मुख्य चर्चा बन गया है। पीठ ने कहा कि सोनिया विहार के लोगों का विरोध एकदम जायज है।

एक सर्वे के अनुसार पता चला है कि दिल्ली की आधी आबादी फेफड़ों के कैंसर की चपेट में है और इस कैंसर का मुख्य कारण यही कूड़ा करकट है। ऐसे में यदि इस कूड़े का सही तरह से निपटारा नहीं किया गया तो वह दिन दूर नहीं जब दिल्ली पूरी तरह से खत्म हो जाएगी। उपराज्यपाल का पक्ष सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि किसी के घर के सामने कूड़ा नहीं फेंका जाना चाहिए ऐसे में हमें भविष्य का सोचना पड़ेगा और कूड़े को अलग-अलग हिस्सों में रखा जाना चाहिए या फिर सरकार को इसे लोगों के घर से ही उठाने का प्रबंध करना चाहिए।

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