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ये है कारगिल युद्ध के असली हीरो, 21 गोलियां लगने के बाद भी मारा था 48 पाकिस्तानियों को

साल 1999 में भारत और पाकिस्तान के बीच में कभी ना भूलने वाला कारगिल युद्ध हुआ था. इस युद्ध में बहुत सारे जवानों ने देश की रक्षा के लिए अपनी जान गंवाई. लेकिन इनमे एक ऐसा शख्स भी था, जिसे आज भी लोग कारगिल का हीरो कह कर याद करते हैं. दरअसल, यह शख्स कोई और नहीं बल्कि दिगेंद्र कुमार है. द्वितीय बटालियन के मेजर विवेक गुप्ता को कुछ सैनिकों के साथ 15,000 फीट की ऊँचाई पर स्तिथ टोलोलिंग हिल पर कब्ज़ा करने का आदेश देकर भेजा गया था. इन सैनिको में दिगेंद्र भी शामिल थे.

पहाड़ी चढ़ने का सफ़र

इस टीम में मेजर विवेक गुप्ता के साथ  सुबेदार भंवर लाल भाकर, सुबेदार सुरेंद्र सिंह राठौर, लांस नायक जसवीर सिंह, नायक सुरेंद्र, नायक चमन सिंह तिवातिया, लांस नायक बच्चन सिंह, सीएमएच जशवीर सिंह, हवलदार सुल्तान सिंह नारवर और दिगेंद्र कुमार शामिल थे. कारगिल युद्ध जीतने के लिए टोलोलिंग पहाड़ी पर कब्जा करना बहुत जरूरी था, इसलिए जनरल मलिक ने गुमरी में राजपूताना राइफल्स की एक बैठक बुलाई और स्थिति की व्याख्या की. इस बीच मिशन पूरा करने के लिए विभिन्न आवश्यकताओं के साथ साथ, दिगेंद्र ने उच्च शक्ति के इंजेक्शनस की भी मांग की, जो ऊँचाई चढ़ने के दौरान उनकी थकान को दूर कर सके. 

ऐसे हुई लड़ाई की शुरुआत

सेना के लिए पहाड़ियों पर चढ़ना इतना कठिन था कि जब भी उनके हाथ काम करना बंद कर देते थे, तो उन्हें रस्सी को अपने दांतों से पकड़ कर खुद को सम्भालना पड़ता. आखिरकार 16 घंटों की लगातार मेहनत के बाद वह टोलोलिंग पहाड़ी पर पहुंचे. मिशन के अनुसार कुमार को 11 बंकरों में से पाकिस्तान के पहले और आखिरी बंकरों को नष्ट करना था और शेष बंकरों को नष्ट करने की पूरी ज़िम्मेदारी बाकी सैनिको की थी. तभी भारतीय सैनिकों ने हमला शुरू कर दिय.  दिगेंद्र ने पहले बंकर को सफलतापूर्वक नष्ट कर दिया था. लेकिन इससे भोखला कर पाकिस्तानी सेना ने भारतीय सैनिकों पर गोलीबारी करनी शुरू कर दी. इस भागा दौड़ी में दिगेंद्र की छाती पर तीन गोलियां लग गई और वह बुरी तरह से घायल हो गये.

लेकिन इसके बावजूद भी उन्होंने हार नहीं मानी और आखिरकार 3 जून 1999 को सुबह चार बजे भारतीय तिरंगे का ध्वज फहराया और जीत का ऐलान किया. दिगेंद्र एकमात्र ऐसे जांबाज़ थे जिन्होंने अकेले 48 पाकिस्तानी सैनिको को मौत के घाट उतार दिया. यह कारगिल युद्ध एक ऐसी प्रेरणादायक घटना है, जिसे हर युवा को याद रखना चाहिए. 

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